Rajasthan Farmer Cultivates Pearls

Believe it or not, even pearls can be cultivated too. A farmer from Kishangarh-Renwal in Rajasthan has been doing just this for years and making good money. He is even giving training to others on this technique. The farmer says that by investing 15 to 50 thousand Rupees one can earn two to three lakhs annually.  

‘पैसों का पेड़ लगाना‘ और ‘मोती की खेती‘ करना अब तक जुमलों और कहानी-किस्सों का हिस्सा हुआ करते थे लेकिन किस्सों को हकीकत में बदलते हुए ‘मोती की खेती‘ कर प्रदेश के सैंकड़ों किसान अपनी किस्मत को चमकाने में लगे हुए हैं। जयपुर जिले के किशनगढ़-रेनवाल के ऎसे ही सफल किसान श्री नरेन्द्र गिर्वा प्रदेश के अन्य किसानों को भी प्रशिक्षण और सलाह देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की बेहतरीन कोशिश कर रहे हैं। 

श्री नरेन्द्र गिर्वा को जब कुछ साल पहले मोती की खेती के कॉन्सेप्ट का पता लगा तो उन्होंने थोड़े संकोच के साथ इसकी शुरूआत कर दी। लेकिन कुछ ही महीनों में वे सफल होते नजर आए। वे कहते हैं कि कोई भी किसान केवल 15 से 50 हजार रुपए का निवेश कर सालाना 2 से 3 लाख रुपए आसानी से कमा सकता है। किसान 5 से 10 रुपए में समुद्री क्षेत्रों से सीपी खरीद कर उन्हें साल भर या 18 महीने रखकर एक सीपी से 2 मोती कमा सकता है। बाजार में एक मोती 200 से 2000 रुपए तक आसानी से बिक जाता है। पिछले कई सालों से नरेन्द्र मोती की खेती कर हर साल लाखों रुपए कमा रहे हैं। वे किशनगढ़ में बेहद कम खर्चे पर किसानों को प्रशिक्षण भी देते हैं। दो दिन के प्रशिक्षण में एक दिन पै्रक्टिकल और एक दिन थ्योरी सिखाते हैं। 

ऎसे बनता है बीज से मोती 

श्री नरेन्द बताते हैं कि समंदर में मिलने वाली एक सीपी 5 से 10 रुपए में आसानी से मिल जाती है। सबसे पहले हम लाई गई सीपियों में बीज डालने का काम करते हैं। जैसा बीज होता है वैसे ही मोती का निर्माण सीपी के पेट में होता है। कृ6ाक एक सीपी में दो बीज डाल सकता है। 12 से 18 महीनों तक बीज सीपियों  के पेट में पड़ा रहता है और पेट में ही मोती का आकार लेने लगता है। इस दौरान अर्धगोलाकार और गोलाकार मोती बनने लगता है। बाजार में असली मोती की अच्छी डिमांड है।  

News Source
DIPR, Rajasthan

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