
गुजरात के 4800 गांवों को "बाहर में मलत्याग करने से मुक्त" (ओडीएफ) घोषित किया गया
केन्द्रीय पेयजल और स्वच्छता सचिव श्री परमेश्वरन अय्यर ने आज गुजरात का राजकीय दौरा किया जहां उन्होंने मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (सफाई) से मुलाकात कर "बाहर में मलत्याग करने से मुक्त" (ओडीएफ) स्थिति के प्रगति की समीक्षा की।
सुश्री जयंती रवि, राज्य के प्रमुख सचिव (स्वच्छता), ने विभिन्न पहलुओं द्वारा इस संबंध में राज्य द्वारा लिए जा रहे कदम से केंद्रीय टीम को अवगत कराया। राज्य ने 73.75% की स्वच्छता क्षेत्र हासिल किया है और गुजरात के 4800 गांवों को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में व्यवहार बदलने का प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी और साथ ही विकास साझेदारों जैसे विश्व बैंक, यूनिसेफ और टाटा ट्रस्ट जैसे विभिन्न विकास समूहों का सहयोग मिला है।
इस अवसर पर आईईसी (सूचना-शिक्षा-संचार)/पारस्परिक जैसे उपकरण को राज्य द्वारा आयोजित एक प्रदर्शनी में दिखाया गया था। राज्य द्वारा एक प्रस्तुति भी पेश की गई जिसमें राज्य की रणनीति पर प्रकाश डाला गया। अंतर-विभागीय अभिसरण एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में तैनात किया जा रहा है। विशेष ध्यान देने हेतु समुदाय के दृष्टिकोण में क्षमता निर्माण पर चर्चा की गई। यह निर्णय लिया गया कि इस उद्देश्य का समर्थन करने के लिए 20 वास्तविक कक्षाएं राज्य में स्थापित की जाएगीं। राज्य ने गांव स्तर तक पहचान करने और प्रशिक्षण अभिप्रेरकों के लिए एक विस्तृत योजना भी पेश की।
सभी विकास साझीदारों के साथ एक बैठक की गई जिसमें प्रगति, समर्थन आवश्यकताओं और चुनौतियों पर चर्चा की गई।
बाद में सचिव ने गुजरात के मुख्य सचिव श्री जी आर अलोगिया से मुलाकात की और वीडियो सम्मेलन के जरिए गुजरात के सभी जिला विकास गुजरात अधिकारियों (डीडीओ) से बात की। जिलों ने स्वच्छता हासिल करने के लिए योजना और प्रयास में तत्परता व्यक्त की।
सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि स्वच्छ भारत व्यवहार में परिवर्तन लाने का एक कार्यक्रम है और हमें इसे अभियान की तरह करना चाहिए, हमे इसके लिए गुणवत्ता और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित रखना होगा। इस कार्यक्रम की सफलता इसी में है कि लोगों को खुद ही शौचालय की जरूरत हो। साथ ही इस बात पर सहमति भी हुई कि राज्य खुद भी एक स्वतंत्र समवर्ती मूल्यांकन प्रणाली लाए।