ECI Ready To Pilot Remote Voting For Domestic Migrants

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Migrant voter need not travel back to home state to vote

ECI develops prototype Multi-Constituency Remote Electronic Voting Machine (RVM); invites political parties for demonstration of prototype RVM

Prototype RVM can handle multiple constituencies from a single remote polling booth

ECI floats concept note soliciting views from Political Parties on legal, operational, administrative and technological challenges

Migration based disenfranchisement is indeed not an option in the age of technological advancement. The voter turnout in General Elections 2019 was 67.4 % and the Election Commission of India is concerned about the issue of over 30 Crore electors not exercising their franchise and also differential voter turnout in various States/UTs. It is understood that there are multifarious reasons for a voter not opting to register in a new place of residence, thus missing out on exercising the right to vote. Inability to vote due to internal migration (domestic migrants) is one of the prominent reasons to be addressed to improve voter turnout and ensure participative elections. Although there is no central database available for migration within the country, the analysis of available data in public domain points to work, marriage and education related migration as important components of domestic migration.  Out-migration is predominant among the rural population in overall domestic migration. Approximately 85% of the internal migration is within the States.

Soon after assuming office as Chief Election Commissioner, Shri Kumar’s learning of domestic migration issues first hand from his trek to Dumak village in Chamoli district, focused his attention on enabling the migrant voters to exercise their franchise from their current place of residence. Realising such empowerment would entail a host of legal, statutory, administrative and technological interventions, ECI team has deliberated at length to find inclusive solutions to facilitate electoral participation of migrants across all socio-economic strata and explored alternative voting methods like two-way physical transit postal ballots, proxy voting, early voting at special Early Voting Centres, one-way or two-way electronic transmission of postal ballots (ETPBS), Internet-based voting system etc.

With the objective of finding a technological solution which is credible, accessible and acceptable to all stakeholders, the Commission headed by Chief Election Commissioner Shri Rajiv Kumar along with Election Commissioners Shri Anup Chandra Pandey and Shri Arun Goel has now explored the option of using a modified version of the time-tested model of M3 EVMs to enable voting at remote polling stations i.e., polling stations outside home constituency, for domestic migrants. The migrant voter would thus need not travel back to his/her home district to exercise his/her franchise of voting.

A concept note has been circulated amongst political parties (https://eci.gov.in/files/file/14714-letter-to-political-parties-on-discussion-on-improving-voter-participation-of-domestic-migrant-using-remote-voting/ ) highlighting the challenges of defining domestic migrants, implementation of Model Code of Conduct, ensuring secrecy of voting, facility of polling agents for identification of voters, process and method of remote voting and counting of votes amongst other issues.

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The Commission in association with a renowned Public Sector Undertaking is now ready to pilot a Multi Constituency Remote Electronic Voting Machine (RVM) for facilitating participation of domestic migrants from their remote locations itself i.e., the places of their current residence for purposes of education/employment, etc., for voting for their home constituencies. This modified form of EVM can handle up to 72 multiple constituencies from a single remote polling booth. The initiative, if implemented, can lead to a social transformation for the migrants and connect with their roots as many times they are reluctant to get themselves enrolled at their place of work for various reasons such as frequently changing residences, not enough social and emotional connect with the issues of area of migration, unwillingness to get their name deleted in electoral roll of their home/native constituencies as they have permanent residence/property etc.

The Commission has invited all Recognised 08 National and 57 State Political Parties on   16.1.2023 to demonstrate the functioning of the multi-constituency prototype Remote EVM. The Technical Expert Committee members will also be present. The Commission has also solicited written views of recognised political parties by 31.01.2023 on various related issues including changes required in legislation, changes in administrative procedures and voting method/RVM/technology, if any other, for the domestic migrants.

Based on the feedback received from various stakeholders and demonstration of the prototype, the Commission will appropriately carry forward the process of implementing remote voting method.

भारत निर्वाचन आयोग ने रोजगार, शिक्षा या अन्‍य कारणों से गृह नगर से देश में अन्‍यत्र बसे नागरिकों को रिमोट वोटिंग की सुविधा देने पर काम शुरू किया;

देश में कहीं से भी अपने गृह/मूल निर्वाचन क्षेत्र के लिए मतदान करना संभव होगा;
प्रवासी मतदाताओं को मतदान के लिए वापस अपने गृह राज्‍य/नगर जाने के झंझट से मुक्ति मिलेगी

आयोग ने प्रोटोटाइप रिमोट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (आरवीएम) विकसित की; यह एक रिमोट पोलिंग बूथ से ही 72 तक निर्वाचन क्षेत्रों का मतदान करा सकती है

भारत निर्वाचन आयोग ने प्रोटोटाइप आरवीएम के प्रदर्शन के लिए राजनीतिक दलों को किया आमंत्रित; कानूनी, प्रक्रियात्मक, प्रशासनिक और प्रौद्योगिक चुनौतियों पर राजनीतिक दलों की राय जानने के लिए अवधारणा पत्र जारी किया

प्रौद्योगिकीय तरक्‍की के युग में प्रवासन (Migration) के आधार पर मतदान के अधिकार से वंचित करना स्वीकार योग्य विकल्‍प नहीं है। आम चुनाव 2019 में 67.4% मतदान हुआ था और भारत निर्वाचन आयोग 30 करोड़ से अधिक निर्वाचकों द्वारा मतदान करने के अपने अधिकार का प्रयोग नहीं करने और विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मतदान का प्रतिशत अलग-अलग होने को लेकर सजग है। यह माना जाता है कि एक मतदाता द्वारा निवास के नए स्थान में पंजीकरण न कराने और इस तरह, मतदान करने के अधिकार का प्रयोग करने का अवसर गंवाने के अनेक कारण होते हैं। वोटर टर्नआउट में सुधार लाने और निर्वाचन में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रमुख बाधा आंतरिक प्रवासन (घरेलू प्रवासियों) के कारण मतदाताओं द्वारा मतदान न कर पाना भी है जिसका समाधान किया जाना आवश्यक है। हालांकि, देश के भीतर प्रवासन के लिए कोई केंद्रीय डेटाबेस उपलब्ध नहीं है, फिर भी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण से यह पता चलता है कि रोजगार, शादी और शिक्षा से संबंधित प्रवासन समग्र घरेलू प्रवासन का महत्वपूर्ण घटक है। अगर हम समग्र घरेलू प्रवासन को देखें तो ग्रामीण आबादी के बीच बहिर्प्रवासन बड़े पैमाने पर देखा गया है। आंतरिक प्रवासन का लगभग 85% हिस्‍सा राज्यों के भीतर होता है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में कार्यभार संभालने के तुरंत बाद, श्री कुमार चमोली जिले के दुमक गांव के दूरस्थ मतदान केंद्र की अपनी पैदल यात्रा (ट्रैकिंग) से आंतरिक प्रवासन की समस्‍या से सीधे रूबरू हुए और उन्होंने अपना ध्‍यान इस बात पर केन्द्रित किया कि प्रवासी मतदाताओं को निवास के उनके वर्तमान स्थान से ही मताधिकार का प्रयोग करने में सक्षम बनाया जाए। इस तरह के सशक्तिकरण को कार्यान्वित करने के लिए कानूनी, वैधानिक, प्रशासनिक और प्रौदयोगिकीय पहल की जरूरत है। आयोग की टीम ने सभी सामाजिक-आर्थिक स्तरों पर प्रवासियों की चुनावी भागीदारी को संभव बनाने के लिए सर्वसमावेशी समाधान ढूंढने और मतदान करने की वैकल्पिक पद्धतियों जैसे कि दो-तरफ़ा प्रत्‍यक्ष ट्रांजिट पोस्‍टल बैलट, परोक्षी (प्रॉक्सी) मतदान, विशेष समय-पूर्व मतदान केंद्रों में जल्‍दी मतदान, डाक मतपत्रों का एकतरफा या दोतरफा इलेक्ट्रॉनिक प्रेषण (ईटीपीबीएस), इंटरनेट आधारित मतदान प्रणाली आदि सभी विकल्पों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

सभी हितधारकों के लिए विश्वसनीय, सुगम और स्वीकार्य प्रौद्योगिकीय समाधान की तलाश करने के उद्देश्य से निर्वाचन आयुक्त श्री अनूप चन्द्र पाण्डेय आयोग और निर्वाचन आयुक्त श्री अरुण गोयल के साथ मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री राजीव कुमार की अध्यक्षता में आयोग ने घरेलू प्रवासी मतदाताओं के लिए रिमोट मतदान केंद्रों अर्थात गृह निर्वाचन क्षेत्र के लिए रोजगार/शिक्षा स्थल के मतदान केंद्रों से मतदान करने में सक्षम करने के लिए समय की कसौटी पर खरे उतरे M3 ईवीएम मॉडल के संशोधित संस्करण का उपयोग करने का विकल्प ढूंढा है। इस तरह प्रवासी मतदाता को अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए वापस अपने गृह जिले की यात्रा करने की जरूरत नहीं होगी।

अन्य विषयों के साथ ही घरेलू प्रवासियों को परिभाषित करने, आदर्श आचार संहिता लागू करने, मतदान की गोपनीयता बनाए रखने, मतदाताओं की पहचान के लिए पोलिंग एजेंटों को सुविधा देने, रिमोट मतदान की प्रक्रिया और पद्धति तथा मतों की गणना में  आने वाली चुनौतियों का उल्‍लेख करते हुए सभी राजनैतिक दलों के बीच एक अवधारणा पत्र परिचालित किया गया है। (https://eci.gov.in/files/file/14714-letter-to-political-parties-on-discussion-on-improving-voter-participation-of-domestic-migrant-using-remote-voting/ )

कानूनी चुनौतियां

वे कानून/नियम जिनमें संशोधन किया जाना अपेक्षित है:

  • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951
  • निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961
  • निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960

प्रवासी मतदाता को परिभाषित करना

  • मतदान दिवस में अनुपस्थित रहने वाले मतदाता से लेकर स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता
  • ‘मामूली निवास’ और ‘अस्थायी रूप से अनुपस्थित मतदाता’ की विधिक संरचना के परिप्रेक्ष्य में मूल स्थान पर पंजीकरण को बनाए रखना

रिमोट वोटिंग को परिभाषित करना

  • राज्यक्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र की संकल्पना से निपटना
  • दूरवर्तिता को परिभाषित करना: निर्वाचन क्षेत्र से बाहर, जिले से बाहर

प्रशासनिक चुनौतियां

 

रिमोट वोटरों की गणना करना –

स्व-घोषणा ?

 

नियंत्रित परिवेश उपलब्ध कराना–रिमोट लोकेशनों पर मतदान की गोपनीयता सुनिश्चित करना

 

रिमोट वोटिंग बूथों पर पोलिंग एजेंटों की व्यवस्था करना और प्रतिरूपण से बचने के लिए मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करना

स्थापित किए जाने वाले बूथों की संख्या और लोकेशन

 

रिमोट मतदान केंद्रों के लिए मतदान कर्मियों की नियुक्ति और उनका पर्यवेक्षण

 

रिमोट लोकेशनों (अन्य राज्य) में आदर्श आचार संहिता लागू करना

प्रौद्योगिकीय चुनौतियां

रिमोट वोटिंग की पद्धति

 

मतदाताओं का पद्धतियों/बहु-निर्वाचन क्षेत्र रिमोट ईवीएम या किसी अन्य प्रौद्योगिकी से परिचित होना

 

रिमोट बूथों पर डाले गए मतों की गणना और उसे अन्य राज्यों में स्थित रिटर्निंग अधिकारी को प्रेषित करना

 

आयोग सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठित उद्यम के सहयोग से घरेलू प्रवासी मतदाताओं की भागीदारी को संभव करने के लिए उनके रिमोट लोकेशन अर्थात शिक्षा/रोजगार आदि के प्रयोजन से उनके मौजूदा निवास स्थान से, उनके गृह निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदान करने की सुविधा प्रदान करने के लिए एक बहु-निर्वाचन क्षेत्र रिमोट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (आरवीएम) को प्रायोगिक तौर पर शुरू करने के लिए तैयार है। ईवीएम का यह संशोधित रूप एक एकल रिमोट पोलिंग बूथ से 72 विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों पर मतदान करा सकता है।

यदि यह पहल कार्यान्वित कर दी जाती है तो यह प्रवासियों के लिए एक बड़ा सामाजिक परिवर्तन लेकर आने की क्षमता रखती है और उन्हें अपनी जड़ों से जुड़े रहने में मददगार होगी, क्योंकि कई बार वे विभिन्न कारणों जैसे कि उनके निवास स्थानों के नियमित तौर पर बदलने, प्रवास क्षेत्र के मुद्दों से सामाजिक और भावनात्मक रूप से पर्याप्त जुड़ाव न होने, अपने गृह/मूल निर्वाचन-क्षेत्रों की निर्वाचक नामावली से नाम कटवाने की अनिच्छुकता (चूंकि उनका वहां स्थायी निवास/संपत्ति होती है) से अपने कार्यस्थान पर स्वयं को मतदाता के रूप में पंजीकृत करवाने के प्रति अनिच्छुक रहते हैं।

आयोग ने बहु-निर्वाचन क्षेत्र प्रोटोटाइप रिमोट ईवीएम की कार्यप्रणाली का प्रदर्शन करने के लिए सभी मान्यताप्राप्त 08 राष्ट्रीय और 57 राज्यीय दलों को दिनांक 16.01.2023 को आमंत्रित किया है। इस अवसर पर आयोग की तकनीकी विशेषज्ञ समिति के सदस्य भी उपस्थित रहेंगे। आयोग ने अपेक्षित विधिक परिवर्तनों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं में परिवर्तनों और घरेलू प्रवासी मतदाताओं के लिए मतदान की पद्धति/आरवीएम/प्रौद्योगिकी, यदि कोई हो, सहित विभिन्न संबंधित मामलों पर मान्यताप्राप्त राजनैतिक दलों से 31.01.2023 तक लिखित मंतव्य देने का भी अनुरोध किया है।

      विभिन्न हितधारकों से प्राप्त फीडबैक और प्रोटोटॉइप के प्रदर्शन के आधार पर आयोग रिमोट मतदान पद्धति को क्रियान्वित करने की प्रक्रिया को उपयुक्त तरीके से आगे ले जाएगा।

 

News Source
PIB Release

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