एकल का पूर्व छात्र राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतियोगिता में शामिल

In the one teacher Ekal schools running in more than 85,000 villages across the country, the teaching is done through games, songs, stories etc. This creates an environment loved by the rural children. Apart from studies some students excel in sports too. This is the story of one Karn Singh from village Rajol, in Kotla block of Himachal Pradesh. Karn, from the very beginning was a sports lover with special interest in wrestling. He used to participate in all bouts around. He later performed very well in the state championship, and won several awards too. He even performed very well in the national championship. Similarly, one Muslim girl, Shabina, from the same school excelled and played in the state team in Kho-Kho and Kabbadi.

एकल विद्यालय में खेल-कूद, गीत-कहानी के माध्यम से बच्चों में शिक्षा के प्रति जागरूकता पैदा की जाती है। ऐसा प्रायः देखा गया है कि बचपन में खेल ही प्रिय होता है। जितना आकर्षण खेल के प्रति रहता है उतना आकर्षण पढ़ाई के प्रति नहीं। अगर खेल को भी पढ़ाई के रूप में विकसित किया जाए तो उस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है जो पढ़ाई के द्वारा कर सकते है। ऐसा ही एक उदाहरण प्रस्तुत हुआ है एकल विद्यालय के अनौपचारिक शिक्षण-पद्धति के माध्यम से।

हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा ज़िला तहसील ज्वाली संच कोटला स्थित रज़ोल ग्राम में चलने वाला एकल विद्यालय के छात्र कर्ण सिंह ने राष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती की प्रतिभा को प्रदर्शित किया है। रज़ोल ग्राम के एकल विद्यालय में 25 नामांकित छात्रों में से एक कर्ण सिंह वर्ष 2002 से वर्ष 2005 तक छात्र था। वर्ष 2006 में राजकीय प्राथमिक पाठशाला रज़ोल में पांचवीं कक्षा में नामांकन कराया। वर्ष 2011 में राजकीय उच्च विद्यालय अमनी से दसवीं तक की पढ़ाई पूरी कर वर्ष 2013 में बारहवीं की परीक्षा पास की। कर्ण एकल विद्यालय में जब पढ़ता था उस समय खेल-कूद में बेहद रूची थी, कुश्ती में हमेशा अच्छा प्रदर्शन करता था। उसने कुश्ती खेल को शौक के रूप में विकसित किया।

हिमाचल राज्य स्तरीय कुश्ती में उसने अच्छा प्रदर्शन किया। कई पुरस्कारों से उसे पुरस्कृत किया गया है। ज़ोनल स्तर पर-राजकीय उच्च विद्यालय संदवा, नुरपुर में ज़िला स्तर पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कोटला में, राज्य स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता - सोलन में तथा राष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती प्रतियोगिता- राजस्थान प्रांत के जयपुर में उसने अच्छा प्रदर्शन किया है।

एकल विद्यालय राज़ोल ग्राम के तत्कालीन आचार्य श्री अजय राणा अपने पढ़ाए हुए, उस एकल छात्र कर्ण सिंह के बारे में कहते है कि बचपन से ही उसमें कुश्ती के प्रति-विशेष लगाव था। हिमाचल राज्य के प्रायः सभी ज़िलों में वह हर स्तर पर कुश्ती के दंगल में शामिल होता है एवं अच्छा प्रदर्शन करता है। कुश्ती का खेल अपनी भारतीय संस्कृति से भी जुड़ा हुआ है।

ऐसे प्रतिभाशाली-एकल विद्यालय के पूर्व छात्र एकल अभियान का ही नहीं बल्कि देश का भी गौरव है। एकल विद्यालय स्वामी विवेकानन्द जी के आदर्शो पर चलता है। स्वामी विवेकानन्द जी कुश्ती, खो-खो, कबड्डी आदि खेलों का संदेश देते थे। एकल विद्यालय के माध्यम से स्वामी जी के संदेशों को एकल विद्यालय के छात्रों द्वारा आत्मसात किया जा रहा है। यही एकल गौरव है।

इसी एकल विद्यालय की दूसरी छात्रा शवीना, जोकि मुस्लिम परिवार की है, ग्राम राज़ोल एकल विद्यालय में वह वर्ष 2002 से वर्ष 2004 तक पढ़ाई की। वर्ष 2005 में राजकीय प्राथमिक विद्यालय रज़ोल से पांचवीं तथा वर्ष 2011 में राजकीय उच्च विद्यालय कोटला में दसवीं तथा वर्ष 2015 में प्राइवेट परीक्षा से 12वीं की परीक्षा पास की है। एकल की पूर्व छात्रा शवीना ने एकल विद्यालय में पढ़कर अपनी पढ़ाई एवं खेल की प्रतिभा को निखारा है। कबड्डी एवं खो-खो खेल में इनको सर्वाधिक रूचि थी। इस खेल में इसका अच्छा प्रदर्शन था। इसलिए इसका चयन खो-खो एवं कबड्डी में प्रखंड स्तर से लेकर राज्य स्तर के खेल में हो सका। कबड्डी एवं खो-खो खेलों के प्रतियोगिता में प्रखण्ड स्तर पर कोटला में व ज़िला स्तर एवं राज्य स्तर पर भी वह अच्छा खासा प्रदर्शन कर पायी। उसने खुद को और एकल को नाम दिया

News Source
Ekal

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