Value Education

दायित्व RESPONSIBILITY

मानव जीवन कर्म प्रधान है। जन्म के साथ ही संबंध और कर्तव्य जुड़ जाते हैं। मनुष्य कभी अकेला नहीं रहता, किसी-न-किसी की आवश्यकता तो उसे पड़ती ही है और जब साथ में जीवन बिताना ही है , तो एक-दूसरे के हित को भी विचार करना पड़ता है।यहीं से दायित्व आरम्भ होता है।

दायित्व का अर्थ जिम्मेदारी भी होता है। दायित्व

संगति FRIENDSHIP

संगति अर्थात  साथ रहना, जिस भी वस्तु, विषय या व्यक्ति के साथ निरंतर संपर्क में हम रहते हैं उसका प्रभाव हमारे व्यक्तित्व पर पड़ जाता है। संगति यही  है।सदा सद्संगति में ही रहना चाहिए, जिससे कि जीवन में सद्भाव , सदाचार और नैतिकमूल्यों को अपना सकें।विशेष कर बालावस्था  और  किशोरावस्था में संगति का अधिक

अनुुुुभूति EPIPHANY

अपने अनुभव से प्राप्त होनेवाला आभास ही अनुभूति है। महान उपदेशक के उपदेश को हम सुनते हैं, किन्तु उसे अपने जीवन में आत्मसात करने के लिए अनुभूति की आवश्यकता होती है।

दैनिक जीवन में कई प्रसंग ऐसे होते हैं, जिनसे हम कुछ-न-कुछ सीखते हैं। हम तभी सीखते जब मन मानता है I स्व-आभास की आवश्यकता है।आत्मा जब किसी

साहस BRAVERY

साहस से मनुष्य असंभव को भी संभव बना सकता है। साहस की आवश्यकता केवल युद्ध में ही नहीं, सार्वजनिकजीवन में भी पड़ती है।कई अवसर ऐसे आते हैं, जिसमें कि हमारे पास सब कुछ होते हुए भी कार्य पूर्ण नहीं होता, उस कार्य को पूर्ण करने का साहस नहीं होता।

साहस के लिए शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक बल की भी आवश्यकता

भाग्य GOOD LUCK

भाग्य वह है, जिसे हम समझते हैं कि ईश्वर ने रचा है I भाग्य में जो लिखा है वही होगा, किंतु यह सच नहीं है I भाग्य ईश्वर द्वारा दिया गया एक संकेत है, जिसे  प्रेरणा मान कर हमें कर्म करना है। भाग्य अलौकिक है कभी-कभी, किंतु अदृश्य नहीं है। परिश्रम भाग्य की पहली सीढ़ी  है।भाग्य भरोसे बैठे रहने से लाभ नहीं

KUCH TUM BADLO, KUCH HUM BADLE

परिवर्तन संसार का नियम हैI प्रत्येक विषय वस्तु सदा परिवर्तित होती रहती है, क्योंकि समय कभी ठहरता नहींI सारांश यह है कि भौतिकता सदा बदलती रहती है।हम जिस भी परिवेश में रहते हैं, उस वातावरण का प्रभाव हम पर रहता है, इसलिए हमारी एक निश्चित धारणा बन जाती है, कभी-कभी हमारी सोच हमारी धारणा कल्याणकारी रहती

संस्कृति CULTURE

आत्मा संस्कृति है तो, सभ्यता शरीर है। शरीर नश्वर है किंतु आत्मा अमर है। किसी भी देश में भौतिक बदलाव आते हैं, सभ्यता बदलती है, किंतु संस्कृति नहीं।हमारा खान-पान, रहन-सहन और जीवनशैली ये सभी संस्कृति के अंग हैं। भारतीय संस्कृति उत्कृष्ट उदाहरण हैं।उदाहरण स्वरूप हम अभिवादन के लिए हाथ जोड़ते हैं I कितने

अनुकरण IMITATION

शिशु जब जन्म लेता तो वह सभी विषयों से अनभिज्ञ रहता है। धीरे-धीरे अपने आसपास के परिवेश केक्रियाकलापों को देख कर वह भी वैसा ही करने लगता है।यही है अनुकरण, कुछ देख कर  वैसा ही करना अर्थातसीखना। हम अपने जीवन में जो भी कार्य करते हैं वह इसी संसार से सीखते हैं।

अनुकरण करते हैं। अनुकरण सकारात्मक होना

परोपकार BENEVOLENCE

परोपकार जीवन नहीं, जीवन के बाद भी जीवंत रहता है। हमारे पुराणों में परोपकार के लिए कई उपदेश लिखे हैं। नदी अपना जल नहीं उपयोग करती। वृक्ष अपना फल नहीं खाता। परोपकार के यह सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।

 मनुष्य अकेला जीवन नहीं जी सकता। मानवता के उद्धार के लिए परोपकार आवश्यक है। इससे स्वयं के साथ-साथ समाज का

स्वच्छता CLEANLINESS

 स्वच्छता का जीवन में सर्वाधिक महत्व है। इसे स्वयं भी अपनाना चाहिए और आस-पास के परिवेश को भी स्वच्छ रखना चाहिए। स्वच्छता से रोग जन्म नहीं लेते। बच्चों को विशेषकर स्वच्छतासिखानी चाहिए। सबसे पहले अपने घर को स्वच्छ और सुंदर बनाएं, फिर अपने घर के आस-पास को। इस प्रक्रिया से अन्य सभी स्थानों पर भी धीरे

सच्ची लगन EARNESTLY

सच्ची लगन सफलता का मूल मंत्र है। कोई भी कार्य सच्ची लगन के बिना पूर्ण नहीं हो सकते। डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं डॉ. ए.पी.जे. कलाम जैसे महापुरुष इसके सशक्त उदाहरण हैं। डॉ. भीमराव ने विपरीत परिस्थितियों में शिक्षा ग्रहण की।अभाव पूर्ण जीवन में शिक्षा आरंभ की किन्तु बाद में उच्च शिक्षा के स्वामी बनें।

भारती

सच का महत्व IMPORTANCE OF TRUTH

सच का महत्व शब्दों से नहीं जाना जा सकता, इसे अपने जीवन, व्यवहार में अपनाकर समझा जासकता है। सत्य वह शक्ति है, जो हमें निर्भीक बनाती है। नैतिक-मूल्यों को समझकर, सद्‍भावना और अनुशासन के साथ सत्य को अपनाया जा सकता है।

सत्यता का महत्व और परिणाम तब ही समझ सकते हैं, जब इसे दैनिक जीवन में उपयोग मेंलाएंगे।

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